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खाद्य मंत्री पर घोटाले का आरोप
महंगाई पर भारी हंगामा और बहिर्गमन
जयपुर, १० मार्च ।   राजस्थान विधानसभा में आज महंगाई के मुद्दे पर करीब दो घंटे तक हुए हंगामे के दौरान एक मंत्री पर लगे आरोपों तथा सत्ता पक्ष और प्रतिपक्ष की परस्पर नारेबाजी के बीच प्रतिपक्षी सदस्यों ने  बहिर्गमन  किया तथा सदन की कार्यवाही आधा घंटे के लिए स्थगित की गई।
 अध्यक्ष दीपेन्द्र ङ्क्षसह शेखावत ने प्रतिपक्ष के स्थगन प्रस्ताव पर सदन में आज महंगाई के मुद्दे पर दो घंटे की चर्चा का समय निर्धारित किया था। चर्चा शुरु होने से पहले खाद्य एवं नागरिक आपूॢत राज्यमंत्री बाबूलाल नागर को वक्तव्य देना था। लेकिन उनके लंबे वक्तव्य और सीधे महंगाई के मूल मुद्दे से अलग हटने पर प्रतिपक्ष ने कड़ी आपत्ति की जिससे वक्तव्य पूरा नहीं हो पाया।
 भाजपा के उपनेता घनश्याम तिवाडी,  गुलाबचंद कटारिया और राजेन्द्र राठौड सहित अन्य सदस्यों के साथ खाद्यमंत्री की तीखी नोंकझोंक भी हुई । माकपा के अमराराम ने मंत्री का वक्तव्य सदन की टेबल पर रखने की मांग की। भाजपा के राजेन्द्र राठौड़ ने नियम ५२ के हवाले से व्यवस्था का प्रश्न उठाया कि मंत्री विषय वस्तु से हटकर वक्तव्य नहीं दे सकते।
 खाद्य मंत्री ने जब बार-बार गेहूं का उठाव और उसके वितरण संबंधी आंकडों पर जोर दिया तो भाजपा सदस्यों ने दो बार अध्यक्ष के आसन के सामने आकर नारेबाजी की। भाजपा के उपनेता घनश्याम तिवाड़ी ने सरकार पर महंगाई बढाने तथा चीनी और गेंहूं घोटाले का आरोप लगाते हुए सदन से  बहिर्गमन  की घोषणा की। माकपा के अमराराम ने भी इसी आशय की घोषणा की।
 हंगामे के दौरान भाजपा के कालीचरण सराफ और ग्यारसा राम कोली द्वारा मंत्री पर लगाये गये आरोपों को लेकर दोनों पक्षों के  लोग आमने सामने आ गये और परस्पर नारेबाजी की। इस बीच मंत्री ने आरोप सिद्ध होने पर सदन से त्यागपत्र देने की बात कही।
सभापति सुरेन्द्र ङ्क्षसह जाडावत ने आरोपों को अंकि त नहीं करने और कार्यवाही देखकर व्यवस्था देने की बात कही।
 सदन में शोरगुल के नहीं थमने पर सभापति ने महंगाई पर चर्चा समाप्त करने और बजट पर सामान्य वाद विवाद शुरू करने के लिए भाजपा के गुलाबचंद कटारिया का नाम पुकारा। इस बीच सरकारी मुख्य सचेतक वीरेन्द्र बेनीवाल ने मंत्री पर आरोप लगाने वाले सदस्यों से क्षमा याचना करने तथा आसन द्वारा प्रताडऩा देने की बात कही।
 हंगामे के बीच भाजपा के सदस्य अध्यक्ष के आसन के सामने आकर नारेबाजी करने लगे। वहीं सत्ता पक्ष के लोगों ने अपनी सीटों से उठकर गैलरी में आकर जवाबी नारेबाजी की। इसी बीच आसन पर आये सभापति मेजर ओ पी यादव ने अपराह्न ३.१० बजे आधा घंटे के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित करने की घोषणा की। सदन की बैठक शुरू होने पर बजट पर सामान्य चर्चा आरंभ हो गई।

बजट आयोजना में कटौती पर भाजपा का बहिर्गमन

जयपुर, १० मार्च । चालू वित्तीय वर्ष  के बजट आयोजना मदों में कटौती से योजनाओं पर प्रभाव को लेकर प्रश्नकाल में हुई तीखी नोंकझोंक के बाद भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों ने मंत्री के जवाब को भ्रांतिमूलक बताते हुए  आज राजस्थान विधानसभा से बॢहगमन किया।
 इस मुद्दे पर प्रश्नकर्ता भाजपा के राव राजेन्द्र ङ्क्षसह और संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल के बीच काफी देर तक नोंक झोंक हुई।
 भाजपा के उपनेता घनश्याम तिवाड़ी ने कहा कि मंत्री के जवाब से भ्रांति और गलत धारणा बन रही हैं इसलिए हम सदन से  बहिर्गमन  कर रहे हैं ।
 आयोजना मंत्री के रूप में शांति धारीवाल का यही जवाब था कि हर साल फरवरी- मार्च  में बजट आयोजना मद का ३० से ३५ प्रतिशत पैसा खर्च होता आया हैं। प्रश्नकर्ता राजेन्द्र ङ्क्षसह का कहना था कि जनवरी माह तक ६० प्रतिशत खर्च होना और शेष अवधि में ४० फीसदी  खर्चा असंवैधानिक प्रक्रिया है और महालेखाकार इस पर आपत्ति करते हैं। इसी मुद्दे पर मंत्री और भाजपा सदस्यों के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर चला।
 पूरक प्रश्नों के जवाब में धारीवाल ने स्वीकार किया कि चालू वित्त वर्ष में १८६३४.७९ करोड़ रूपये का बजट पेश किया गया और नवम्बर में बीएफसी की बैठकों में ३०४४ करोड़ रूपये की कटौती तथा २९७० करोड़ रूपये की वृद्धि के बाद कुल ७३.९५ करोड़ रूपये की कटौती हुई ।  उन्होंने दावा किया कि जुलाई माह में बजट पेश करने के बावजूद  पहली बार इतनी कम कटौती की गई ।
 भाजपा के गुलाबचंद कटारिया और अन्य सदस्यों ने आॢथक समीक्षा के हवाले से बताया कि जनवरी तक बजट की ६० प्रतिशत राशि १२१३३.३६ करोड़ रूपये खर्च हुए। डेढ़-दो माह में शेष राशि किस तरह खर्च होगी और इससे योजनाओं पर भी असर पड़ेगा।  राजेन्द्र ङ्क्षसह ने आरोप लगाया कि योजना मद में अनुसूचित  जाति पर २.४७ प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति पर ३.२४ प्रतिशत व्यय हुआ।
 धारीवाल ने मूल प्रश्न के जवाब में बताया कि व्यय की प्रगति तथा अन्य कारणों से विभागों के बजट आयोजना मद में कटौती जरूरी थी।  उन्होंनेे कटौती के कारण तथा राशि का विवरण सदन के पटल पर रखते हुए कहा कि इससे योजनाएं प्रभावित नहीं हुई हैं।

इंटरनेट ने बदले मनोरंजन के मायने

आप दुनिया के किसी भी हिस्से में जाएँ सिनेमा ऐसा नशा है जिसका जादू सर चढ़कर बोलता है। इंटरनेट यानी तारों का जाल और इस जाल से मनोरंजन की दुनिया भी बच नहीं पाई हैं। फिल्म और संगीत के रिलीज से लेकर उसके प्रदर्शन और प्रचार तक के कई पहलूओं को इंटरनेट ने बदल कर रख दिया है।
यहाँ तक कि यू ट्यूब से लोगों को हॉलीवुड-बॉलीवुड में ब्रेक मिल रहा है। इंटरनेट विज्ञापनों की भी नई दुनिया बन गई है। आजकल तो फिल्म रिलीज हुई नहीं कि लोग उसकी प्राइरेटिड कॉपी तुरंत ही अवैध तरीके से इंटरनेट के जरिए यू ट्यूब पर डाल देते हैं और घर पर बैठे-बैठे ही फिल्म देख लेते हैं-फस्र्ट डे फस्र्ट शो।
फिल्म 'पा' के रिलीज के दिन हिंदी फिल्मों के शहंशाह अमिताभ बच्चन के साथ क्या हुआ वे खुद बताते हैं, पा जिस दिन रिलीज हुई उसी दिन किसी ने ये फिल्म यू ट्यूब पर डाल दी। हमने यू ट्यूब को कई नोटिस भेजे। वे फिल्म इंटरनेट से हटा देते थे, लेकिन तुरंत कोई फिल्म दोबारा अपलोड कर देता था। मेरी समझ में नहीं आ रहा कि क्या करना चाहिए।
यहाँ मानो अमिताभ भी कहते नजर आए कि इंटरनेट के जाल से निकलना मुश्किल ही नहीं नामुमिकन-सा है।
वेबसाइट पर देखिए फिल्में और सीरियल : इंटरनेट तो मानो अब ऐसा पिटारा बन गया हैं जहाँ आप जो चाहें जब चाहें देख सकते हैं। इसी बाजार का फायदा उठाने के लिए कई कंपनियों ने अपनी-अपनी बेबसाइटें खोली हैं।
'मैंने प्यार किया' और 'हम आपके हैं कौन' जैसी सुपरहिट फिल्में बनाने वाले राजश्री बैनर ने भी अब इस दिशा में कदम बढ़ाएँ हैं और राजश्री डॉट कॉम खोला है। इतने बड़े बैनर ने आखिरकार क्या सोचकर इंटरनेट और ऑनलाइन की दुनिया में कदम रखा।
राजश्री मीडिया के मैनेजिंग डाइरेक्टर और सीईओ रजत बडज़ात्या कहते हैं, हमने देखा कि कई फिल्में लोग अवैध तरीके से इंटरनेट पर डाल रहे थे, पाइरेसी हो रही थी और लोग देख भी रहे थे। तभी हमने सोचा कि क्यों न हम खुद ये काम करें ताकि लोग लीगल या वैध तरीके से ये फिल्में देख पाएँ। बहुत सारी फिल्में मुफ्त में देख सकते हैं। अगर कोई इसे डाउनलोड करना चाहता है तो वो उसे चंद डॉलर की फीस देकर डाउनलोड भी कर सकता है।
रजत बडज़ात्या बताते हैं कि कुछ साल पहले राजश्री की फिल्म विवाह इंटरनेट पर रिलीज की गई थी जिसकी काफी अच्छी प्रतिक्रिया मिली। इसके बाद राजश्री ने जी, स्टार, यू ट्यूब वगैरह से पार्टरनशिप की जो धारावाहिक भी उनकी वेबसाइट पर डालते हैं। यहाँ तक कि बीबीसी मोशन गैलरी से कुछ वीडियो और रिपोर्टें भी इस बेवसाइट पर हैं जो कहीं- कहीं ही देखने को मिलती है।
वे कहते हैं, राजश्री की वेबसाइट खोलने का दूसरा कारण है कि आने वाले कल में लैपटॉप, आईपॉड जैसे उपकरण लोगों के हाथों में जा रहे हैं। इंटरनेट के जरिए इन्हीं पर लोग फिल्में देखेंगे। तो हमने डिजिटल वेंचर खोला और यू ट्यूब पर हमारे 11 चैनल हैं अलग-अलग भाषाओं में।
इरोस इंटरनेशनल ने भी ऐसी ही वेबसाइट शुरू की हुई है। यकीन मानिए ऐसी वेबसाइटें किसी भी फिल्म प्रेमी के लिए किसी खजाने से कम नहीं। देवदास शाहरूख से लेकर दादा मुनी अशोक कुमार तक की फिल्में, सिरीयल आप यहाँ देख सकते हैं।
आप सोचेंगे कि इससे इन वेबसाइटों को क्या फायदा। रजत बडज़ात्या बताते हैं, मुनाफा हमें विज्ञापनों से मिलता है जो इंटरनेट पर कंपनियाँ हमारी वेबसाइट पर डालती हैं। फिर फिल्में आदि डाउनलोड करने के लिए लोग फीस देते हैं। उससे भी आमदनी होती है। तीसरा जरिया है कि हमारा यूट्यूब, अमेजॉन वगैरह से अनुबंध है जो हमारे फिल्में, सिरीयल लेते हैं। यू ट्यूब पर हमारे 21.5 करोड़ वीडियो डाले हुए हैं।
यू ट्यूब से मिली हॉलीवुड फिल्म : इंटरनेट ने फिल्म रिलीज करने का तरीका भी बदल दिया है। रंग दे बसंती से मशहूर हुए अभिनेता सिद्धार्थ की हिंदी फिल्म स्ट्राइकर पिछले महीने थिएटरों के साथ-साथ पूरी दुनिया में एक साथ इंटरनेट पर रिलीज हुई (भारत को छोड़कर)।
जब भारत में लोग इंटरवल के दौरान पॉपकॉर्न खरीद रहे थे तो उसी दौरान हीरो साहब ऑनलाइन थे और दुनिया भर के उन फैन्स के साथ चैट कर रहे थे जो फिल्म को रिलीज के दिन विभिन्न देशों में ऑनलाइन देख रहे थे और ये इंटरनेट का ही कमाल था।
इंटरनेट ने दुनिया के सामने अपनी सृजनशीलता दिखाने के भी नए दरवाजे खोल दिए हैं। जरा इस किस्से पर गौर कीजिए। उरूग्वे के एक निर्माता फेडे अल्वारोज ने पिछले साल नवंबर में करीब पाँच मिनट की एक लघु फिल्म बना यू ट्यूब पर अपलोड की। और चंद दिन बाद उन्हें हॉलीवुड के लिए फिल्म बनाने का प्रस्ताव मिल गया।
बीबीबी से बातचीत में अल्वरारोज बताते हैं, मेरी इस हॉलीवुड फिल्म को प्रायोजित करेंगे सैम राइमी जो स्पाइरमैन और एवल डेड जैसी फिल्में बान चुके हैं। ये अद्भुत था, हम सब चकित थे। अगर कोई निर्देशक यू ट्यूब पर इंटरनेट के जरिए फिल्म डालकर हॉलीवुड की फिल्म हासिल कर सकता है तो फिर ये किसी के लिए भी मुमकिन है।
वहीं नई अभिनेत्री और शक्ति कपूर की बेटी श्रद्धा को तीन पत्ती में अपना पहला रोल इंटरनेट के जरिए ही मिला। निर्माता ने उनकी तस्वीरें फेसबुक पर देखीं और बुला लिया ऑडिशन के लिए।
संगीत और इंटरनेट : संगीत के क्षेत्र में भी इंटरनेट के कारण नए प्रयोग हो रहे हैं। गायक लकी अली ने अपनी ताजा एल्बम सीडी के जरिए नहीं बल्कि ऑनलाइन बाजार में रिलीज की है।
क्यों, खुद लकी बताते हैं, दरअसल जब आप सीडी रिलीज करते हैं तो उसमें रिकॉर्ड कंपनियाँ शामिल हो जाती हैं। लेकिन गायक को पूरा फायदा नहीं मिलता। वो सोचता रह जाता है कि एलबम की बिक्री तो अच्छी है फिर मुझे पैसे क्यों नहीं दे रहे। आपको सिस्टम से लडऩा पड़ता है, हिसाब माँगना पड़ता है। ये कलाकार की फितरत नहीं है कि वो हिसाब माँगे। मैं नाम नहीं लूँगा पर मेरा अनुभव कंपनियों के साथ अच्छा नही रहा। इसलिए मैंने इस बार एलबम ऑनलाइन रिलीज की।
इस माया जाल का एक बड़ा नुकसान ये जरूर है कि इंटरनेट पर बिना कानूनी अधिकार के लोग अवैध रूप से दूसरों की फिल्में, गाने और दूसरी चीजें डाउनलोड करते हैं, लेकिन हर सिक्के के दो पहलू तो होते ही हैं।
राजश्री के रजत बडज़ात्या कहते हैं कि जल्द ही तारों का ये जाल इतना फैल जाएगा कि लोग अपने कंप्यूटर पर ही नहीं अपने मोबाइल, टीवी और यहाँ तक की घडिय़ों जैसे उपकरणों पर भी इंटरनेट के जरिए फिल्में देख पाएँगे।
अपनी बात समेटते हुए वे बड़े आत्मविश्वास से कहते हैं कि मनोरंजन जगत में भविष्य का माध्यम इंटरनेट ही है और इस क्षेत्र में बहुत कुछ नया होना अभी बाकी है। यानी पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त।

स्टूडेंट के बाथरूम में लगाया कैमरा

बर्मिंघम। एक आस्ट्रेलियन लेक्चरर को अपने यहां किराए पर रह रही छात्राओं के बाथरूम में कैमरा लगाकर उनका वीडियो बनाने के आरोप में जेल हो सकती है।
पॉल पोवेन हवांग (33) ने कालेज में पढऩे वाली लड़कियों को किराए पर दिए मकान के बाथरूम के एयर फ्रेशनर में कैमरा लगा दिया था।
उसके घर में किराए पर रह रही एक लड़की ने जब एयर फ्रेशनर को खोला तो उसमें कैमरा निकला। यह देखकर लड़की ने पुलिस को बुला लिया था। आक्सफोर्ड और कैंब्रिज यूनीवर्सिटी में पढ़ा चुका यह लेक्चरर अब यूनिवर्सिटी कॉलेज बर्मिंघम में बिजनेस स्टडीज पढ़ाता है।
2009 में उसके इस कृत्य का खुलासा होने के बाद उसे अपनी नौकरी छोडऩी पड़ी थी। पिछले हफ्ते उसने बर्मिंघम क्राउन कोर्ट के सामने अपना गुनाह कुबूल लिया था। अगले हफ्ते पॉल पोवेन को सजा सुनाई जा सकती है।

उसने लीली के सामने पैंट उतारा और.

अपने मनपसंद कलाकार की नजर में आने के लिए लोग किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार हो जाते हैं। लेकिन लीली एलन का एक प्रशंसक ने एक ऐसा रास्ता अपनाया कि लीली शर्म से पानी-पानी हो गईं थी।
वैसे तो सिंगर लीली एलन अपने तूफानी अंदाज के लिए विख्यात हैं। लेकिन मॉनचेस्टर में ऐसी शर्मजनक घटना घटी कि उन्हें अपना मुंह तक छिपाना पड़ गया। लीली एलन एक क्लब में परफोर्मेस करके जब होटल वापस आ रहीं थी उसी समय एक अनजान व्यक्ति ने उनके सामने आकर अपना पैंट उतार डाला।
इस अजीबो-गरीब हरकत को देखकर पहले तो लीली आश्चर्यचकित रह गईं लेकिन उसके बाद जब उसने पैंट उतारा तो लीली ने अपने पर्स को चेहरे पर लगा लिया।

सोशल नेटवर्किंग दुष्कर्मी की 6000 दोस्त
लंदन। एक लड़की की दुष्कर्म के बाद हत्या करने के आरोप में 35 साल की जेल काट रहे पिशाच ने बनाया था इंटरनेट पर झूठ का जाल। अपने आप को एक 17 वर्षीय किशोर बताने वाले इस 33 वर्ष के दानव की सोशल नेटवर्किंग दुष्कर्मी की 6000 दोस्त नेटवर्किंग साइट्स पर थी 6000 लड़कियों से दोस्ती। इसके जाल में फंसी थी ज्यादातर किशोरिया।
दिखने में गंजा पीटर चैपमेन लड़कियों को एक युवा किशोर की तस्वीरें भेजकर रिझाता था। वो उस आकर्षक युवा की तस्वीर को अपनी बताता था और लड़किया उसके जाल में फंस जाती थी।
यहीं नही अपने फेक फेसबुक प्रोफाइल में वो खुद को सिंगल और डीजे बताता था। उसने पिछले साल अक्टूबर में एशलीन हॉल को अपने जाल में फंसाकर मिलने के लिए बुला लिया था। इसके बाद उसने उसका अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी थी।
हत्या के बाद अगले ही दिन उसने अपना गुनाह भी कुबूल कर लिया था। अब उसे ऐशलीन के कत्ल के लिए 35 साल की सजा हुई है।
उसका निशाना बनी ऐशलीन उन 6000 लड़कियों में से एक थी जिनसे उसने 10 नेटवर्किंग साइट्स के जरिए दोस्ती कर रखी थी। वो इंटरनेट पर लड़कियों का पीछा कर उन्हें दोस्त बनाता था। खास बात यह थी कि उसकी सारी दोस्त सिर्फ लड़कियां ही थी, इनमें से भी ज्यादातर किशोरियां थी।
इससे पहले भी चैपमेन दो वैश्याओं के दुष्कर्म के आरोप में सात साल की जेल काट चुका है। उस पर 15 वर्ष की उम्र में भी दुष्कर्म का आरोप लगा था।
वो इंटरनेट पर चेट के जरिए कई अन्य महिलाओं को अपने बिस्तर तक लाने में भी सफल रहा था। द सन पर छपी खबर के अनुसार जिन महिलाओं से इसके इंटरनेट के जरिए संबंध बने उनका कहना है कि यह महिलाओं को फंसाने में विशेषज्ञ था। वो अपनी मनमोहक बातों से महिलाओं को रिझा लेता था। इसने कई महिलाओं के साथ तो पहली मुलाकात के बाद ही सेक्स किया।

थोड़ा और सो लेना है बेहतर

भारी कामकाज के दिन से पहले अगर आप सामान्य से थोड़ी ज्यादा नींद ले लें तो थकान से निढाल होकर नींद के हाथों बेबस होने से बच सकते हैं। काम करते समय अपनी मेज पर सर रख कर आँख बंद कर लेने वाले नींद की अहमियत अच्छी तरह जानते हैं।
नींद अक्सर उसी समय सवार होती है जब आप को चुस्त दुरूस्त रहने की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। लेकिन अब नए अध्ययन से ये पता चला है कि हम अगर खाते में अतिरिक्त नींद जमा कर दें तो काम के समय सुस्ती से बच सकते हैं। अमरीकी शोधकर्ताओं ने कुछ लोगों के नींद के चक्र पर परीक्षण करके ये नतीजे निकाले हैं।
इस परीक्षण में हिस्सा लेने वाले आधे लोगों को एक सप्ताह तक सोने के लिए अधिक समय दिया गया। जबकि बाकी के भागीदारों को उनकी सामान्य नींद लेने को कहा गया। वॉल्टर रीड आर्मी रिसर्च इंस्टीट्यूट की शोधकर्ता ट्रेसी रप ने एक परीक्षण आयोजित करके नतीजे निकाले हैं।
अतिरिक्त नींद या सामान्य नींद लेने वाले इन सभी लोगों को सप्ताह के बाद प्रयोगशाला में बुलाया गया और अगले हफ्ते भर तक रात भर में सिर्फ तीन घंटे सोने को कहा गया, बाकी के घंटों में उन्हें कुछ जटिल काम दिए गए। ट्रेसी रप इस परीक्षण के नतीजों के बारे में बताया कि अतिरिक्त नींद ले चुके लोगों में उन लोगों के मकाबले ज्यादा चुस्ती और सतर्कता देखी गई, जिन्हें सामान्य नींद ही मिली थी।
इस परीक्षण से ये भी पता चला कि अतिरिक्त नींद लेने वाले लोगों की सेहत में, अगले एक सप्ताह मे, सामान्य नींद लेने वाले लोगों के मुकाबले बेहतर सुधार आया। ट्रेसी रप का कहना था कि अगर आप पहले ही अतिरिक्त नींद ले लें तो, नींद से वंचित रह कर काम करने वाले समय का ज्यादा अच्छी तरह मुकाबला कर सकते हैं।
इस परीक्षण का कामकाजी लोगों को ये फायदा है कि अगर रात को वे अतिरिक्त नींद ले लें तो दिन में उन पर सुस्ती नहीं छाएगी, सैनिकों के लिए तो अतिरिक्त नींद एक तरह से जीवन दान साबित हो सकती है.

बस एक नजर...कर जाएगी काम

हनोवर (जर्मनी)। जल्द ही कंप्यूटर का की बोर्ड गुजरे जमाने की बात हो जाएगा। नजरों के इशारे से ही काम हो जाएगा। शनिवार को यहां खत्म हुए दुनिया के सबसे बड़े आईटी मेले सेबिट में इस बार आई कंट्रोल्ड यानी आंख से नियंत्रित होने वाले कंप्यूटर के स्टॉल पर बहुत से लोग जुटे। आई कंट्रोल्ड कंप्यूटर बनाने वाली स्वीडिश कंपनी टोबी के रॉबटीर्नो परेरा ने कहा कि हमने आई ट्रैकिंग यानी आंख की हर हरकत पर नजर रखने वाला सिस्टम तैयार किया है, जो अलग-अलग क्षेत्रों में काम आता है। इनमें से एक आंख से नियंत्रित होने वाला कंप्यूटर है। इसे खासकर विकलांग लोग इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर वह अपना हाथ इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं तो अपनी आंख के जरिए कंप्यूटर पर काम कर सकते हैं। वे ईमेल लिख सकते हैं। इंटरनेट यूज कर सकते हैं। विंडोज इस्तेमाल कर सकते हैं। मतलब जो चाहे वे कर सकते हैं।
इस तरह के कंप्यूटर तैयार करने वाली टीम में दुनिया भर के आईटी एक्सपर्ट्स की मदद ली गई है। समझा जाता है कि आने वाले समय में कई क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल हो सकता है। परेरा कहते हैं कि एजुकेशनल रिसर्च, साइकॉलजी, मार्केट रिसर्च या ऐडवरटाइजिंग में भी इसका इस्तेमाल हो सकता है। खासकर वहां जहां आप जानना चाहते हैं कि लोग कहां देखते हैं। जल्द ही आई ट्रैकिंग टेक्नॉलजी का इस्तेमाल गाडिय़ों में भी हो सकता है। यानी गाड़ी चलाते हुए यह टेक्नॉलजी बता देगी कि आप थके हुए महसूस कर रहे हैं या फिर गाड़ी चलाते हुए आपका ध्यान ठीक नहीं है। मसलन - आपको क्या दिख रहा है, कौन सी चीज तेजी से आपकी ओर आ रही है। कंप्यूटर गेम में दिलचस्प तरीके से इसका इस्तेमाल हो सकता है, जहां आप सब आंख से कंट्रोल कर सकते हैं।
परेरा बताते हैं कि यह तकनीक कैसे काम करती है। वह कहते हैं, हमने कैमरों का इस्तेमाल किया है जो आपकी आंख की हरकत पर नजर रखते हैं। साथ ही, हमें इन्फ्रारेड लाइट की जरूरत होती है, जो आंख पर एक परावर्तन पैदा करती है। फिर परावर्तन और आंख के घूमने की दिशा से यह सिस्टम पता लगा लेता है कि आप कहां देख रहे हैं। यों तो इस तकनीक का मकसद लाइफ को ईजी बनाना है। आंख से नियंत्रित होने वाले कंप्यूटर बेशक अपाहिजों की जरूरत के हिसाब से बहुत मददगार साबित हो सकते हैं। लेकिन सवाल उठता है कि एक सामान्य इंसान का काम बिना हाथ हिलाए बस नजरों से हो जाए तो क्या वह आलसी नहीं हो जाएगा। परेरा कहते हैं कि नहीं। हमें ऐसी उम्मीद नहीं है। हम समझते हैं कि चीजें और स्पष्ट होंगी और लोग अपने कंप्यूटर का बेहतर तरीके से इस्तेमाल कर पाएंगे। टच स्क्रीन, आंख की हरकत और माउस से चीजें और आसान होनी चाहिए।
सेबिट मेले में कई युवा दिलचस्प गेम खेलने में व्यस्त दिखे तो कई विकलांग उसकी खूबियों को समझ रहे थे। कुछ लोगों की दिलचस्पी इसके पीछे काम करने वाली टेक्नॉलजी को जानने में थी।

शराब पीने से मोटी नहीं होती है महिलाएं

लंदन। अपनी फिगर की चिंता में शराब छोडऩे वाली महिलाओं के लिए अच्छी खबर है। एक ताजा अध्ययन से पता चला है कि दिन भर के काम के बाद शराब पीने से महिलाएं मोटी नहीं होती हैं। वैसे आमतौर पर यह सलाह दी जाती है कि शराब पीने से महिलाएं मोटी हो जाती है।
इसके विपरीत इस अध्ययन में यह पता चला है कि जो महिलाएं शराब पीती हैं उनका वजन उन महिलाओं के मुकाबले बहुत कम बढ़ता है जो स्लिम दिखने के लिए मिनरल वॉटर पीतीं रहती हैं। यही नहीं कम शराब पीने वालों को मोटा होने का खतरा बिल्कुल न पीने वालों से भी कम रहता हैं। अध्ययन में यह पता चला है कि एल्कोहल की एक कैलोरी का मोटापे पर किसी अन्य खाने की एक कैलोरी से कम प्रभाव पड़ता है।
39 वर्ष से अधिक उम्र की 19000 महिलाओं पर 13 वर्ष तक किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि लगभग सभी महिलाओं का वजन बढ़ा लेकिन जो महिलाएं शराब पीती थी उनका सबसे कम वजन बढ़ा। यह भी पाया गया कि जो महिलाएं ज्यादा पीती थी उनका वजन कम बढ़ा। इन महिलाओं में से 38 प्रतिशत शराब नहीं पीती थी।
अध्ययन में शराब के ब्रांड से जुड़े भी रोचक तथ्य सामने आए। यह पाया गया कि रेड वाईन पीने से सबसे कम वजन बढ़ा जबकि बियर और स्पिरिट पीने से सबसे ज्यादा। आर्काइव ऑफ इंटरनल मेडिसिन में छपी इस अध्ययन रिपोर्ट में हालांकि शराब और वजन के बीच कोई सीधा सीधा रिस्ता नहीं बताया गया हैं।

ट्विटर पर सुरेश गोयल की टिप्पणी
{mosimage}द्य राजनैतिक दल इतने संकीर्ण क्यूं हो गये हैं? एक-दूसरे की प्रशंसा करने की भी सौजन्यता इनमें नहीं। आखिरकार महिला विधेयक सबके सहयोग से ही तो पारित हुआ। सभी दल अपनी अपनी गुन्नी ही गा रहे हैं।
द्यइसमें कोई शक नहीं कि महिला आरक्षण विधेयक को आज की स्थिति तक लाने में महिला नेतृत्व तथा महिला संगठनों की प्रमुख भूमिका रही है मगर इस बात से भी इन्कार नहीं किया जा सकता कि पुरूष उदारता के बिना यह संभव नहीं था।
द्यआश्चर्य इस बात का है कि कुछ अति बुद्धिजीवी महिलाएं इस पुरूष उदारता को भी 'पुरूष अहम्' निरूपित करते हुए कह रही हैं कि पुरूष एसा व्यवहार कर रहे हैं जैसे उन्होंने महिलाओं पर उपकार किया हो।
द्यआरक्षण, चाहे वह किसी भी प्रकार का हो या कितना ही आवश्यक या लोकप्रिय क्यूं न हो, अन्तत: है तो अनारक्षित लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर कुठाराघात ही।
द्यराज्यसभा का गठन इसलिये किया गया था कि इसमें देश के नामी गिरामी, अपने अपने क्षेत्र में उत्कृष्ठ कार्य करने वाली हस्तियों को स्थान मिल सके लेकिन राजनैतिक दलों ने बजाय ऐसा करने के अपने अपने दलों के जनता द्वारा ठुकराये गये लोगों को इसमें स्थान दिया। परिणाम सामने है। राज्यसभा का स्तर दिनों दिन गिरता जा रहा है।
-  सुरेश गोयल
twitter.com/sureshgoyal24