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पाक क्रिकेट में भूचाल
- पूर्व कप्तान यूनुस-यूसुफ पर आजीवन पाबंदी
- अफरीदी पर ३० लाख का जुर्माना- ६ माह तक कड़ी नजर
- मलिक-राणा पर एक साल का प्रतिबंध

{mosimage}कराची,१० मार्च । पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने अनुशासनहीनता के लिए कड़ी सजा तय करके आस्ट्रेलिया में टीम के शर्मनाक प्रदर्शन के मद्देजनर अपने दो पूर्व कप्तानों मोहम्मद यूसुफ और यूनुस खान को अनिश्चितकाल के लिए देश की तरफ से खेलने से प्रतिबंधित कर दिया जबकि शोएब मलिक और राणा नावेद उल हसन पर एक साल का प्रतिबंध लगाया है।
पीसीबी ने पाकिस्तान के लचर प्रदर्शन की जांच के लिए गठित समिति की सिफारिशों को लागू करते हुए अकमल बंधुओं कामरान और उमर तथा शाहिद अफरीदी को भी दौरे में अनुशासनहीनता के लिए छह महीने के प्रोबेशन पर रखा है तथा उन पर 20 से 30 लाख रूपये का जुर्माना लगाया है। पीसीबी के कड़े रवैए से देश के मध्यक्रम के दो सबसे सफल बल्लेबाज 32 वर्षीय यूनुस और 35 वर्षीय यूसुफ का अंतरराष्ट्रीय करियर एक तरह से समाप्त हो गया। यही नहीं टीम में अब पूर्ण बदलाव तय है।
आस्ट्रेलिया दौरे पर पाकिस्तान को तीनों प्रारूपों में पराजय का सामना करना पड़ा। पीसीबी ने मामले की जांच के लिए बोर्ड के मुख्य संचालन अधिकारी वसीम बारी की अध्यक्षता में जांच समिति का गठन किया था। पीसीबी ने बयान में कहा, जांच समिति ने सुझाव दिया है कि यूसुफ और यूनुस को किसी भी प्रारूप में अब राष्ट्रीय टीम में नहीं होना चाहिए क्योंकि यह टीम का माहौल खराब करते हैं। इनके अलावा मलिक और राणा पर 12 महीने का प्रतिबंध और 20 लाख रूपये का जुर्माना लगाया गया है। पीसीबी प्रवक्ता नदीम सरवर ने कहा कि बोर्ड ने पाकिस्तानी क्रिकेट को बचाने के लिए जांच समिति की सिफारिशों को लागू करने का फैसला किया।
सरवर ने कहा, समिति ने स्वतंत्र रूप से काम किया और उन्होंने लगभग 13 खिलाडिय़ों से बात की तथा फैसले पर पहुंचने से पहले मैनेजर, कोच, सहायक कोच और कप्तान की रिपोर्ट का अध्ययन किया। उन्होंने कहा, खिलाडिय़ों को हालांकि फैसले के खिलाफ अपील करने का अधिकार होगा और वे इसकी समीक्षा के लिए पीसीबी अध्यक्ष एजाज बट से भी बात कर सकते हैं। पीसीबी के कानूनी सलाहकार और जांच समिति के सदस्य तफज्जुल रिजवी ने कहा, कानून के तहत खिलाडिय़ों को इस सजा के खिलाफ किसी भी अदालत में अपील करने का अधिकार है।  उन्होंने कहा, जांच समिति ने सुनवाई के आधार पर सिफारिशें की। हमने खिलाडिय़ों और टीम अधिकारियों के साथ बात की थी तथा इसके साथ ही टीम मैनेजर, कोच, सहायक कोच और कप्तान की रिपोर्ट का भी आकलन किया था।
रिजवी ने कहा, जांच समिति ने वही किया जो वह पाकिस्तानी क्रिकेट को ढर्रे पर लाने के लिए जरूरी समझती थी। बोर्ड ने कहा, हमने यूसुफ और यूनुस को पाकिस्तान की तरफ से खेलने से प्रतिबंधित किया है लेकिन वे घरेलू क्रिकेट और विदेशी लीग में खेल सकते हैं। बयान में समिति की रिपोर्ट का हवाला देकर कहा गया है, मोहम्मद यूसुफ और यूनुस खान के बीच मतभेद का पूरी टीम पर खराब असर पड़ा। उनके रवैए का भी पूरी टीम पर बुरा प्रभाव पड़ा। वे किसी भी प्रारूप में राष्ट्रीय टीम का हिस्सा नहीं होने चाहिए।
अफरीदी के बारे में जांच समिति की रिपोर्ट में कहा, शाहिद अफरीदी ने शर्मनाक काम किया जिससे इस खेल और देश की बदनामी हुई। उन पर 30 लाख रूपये का जुर्माना लगाना चाहिए। पीसीबी अध्यक्ष को उन्हें चेतावनी देनी चाहिए और उन्हें छह महीने के प्रोबेशन पर रखना चाहिए। इस दौरान उन पर कड़ी निगाह रखनी चाहिए। इस सजा का पाकिस्तान की विश्व ट्वंटी 20 चैंपियनशिप के लिए टीम के चयन पर भी प्रभाव पड़ेगा। पाकिस्तान इस प्रारूप का पूर्व चैंपियन है और इसके लिए इस महीने के अंत तक टीम का चयन किया जाएगा।
अफरीदी को भी छह महीने के प्रोबेशन पर रखा गया है ऐसे में आगामी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट के लिए नए कप्तान का चयन तय है। पीसीबी ने यूसुफ और यूनुस पर प्रतिबंध के बारे में कहा, वे किसी भी प्रारूप में पाकिस्तानी टीम का हिस्सा नहीं होंगे। आजीवन प्रतिबंध का मतलब होता है कि वे घरेलू क्रिकेट या किसी भी अन्य तरह की क्रिकेट नहीं खेल सकते लेकिन हम उन्हें इससे रोक नहीं सकते। वे घरेलू क्रिकेट या काउंटी क्रिकेट आदि में खेल सकते हैं।

युवराज का पहले मैच में खेलना संदिग्ध

मोहाली, १० मार्च। कलाई की चोट से जूझ रहे ङ्क्षकग्स इलेवन पंजाब के धुरंधर बल्लेबाज युवराज ङ्क्षसह का आईपीएल-थ्री में १३ मार्च को दिल्ली डेयरडेविल्स के खिलाफ यहां होने वाले टीम के पहले मैच में खेलना संदिग्ध है।
युवराज ने टीम के अभ्यास सत्र के बाद आज यहां संवाददाताओं से कहा, दिल्ली के खिलाफ मैच में खेलने के बारे में मैं कुछ कह नहीं सकता। इसे लेकर मैं निश्चित नहीं हूं। युवराज के अलावा टीम के आस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज ब्रेट ली और उनके हमवतन खिलाडिय़ों का भी इस मैच में खेलना तय नहीं है।
आईपीएल के पहले दो संस्करणों में टीम की कप्तानी संभालने वाले युवराज ने कप्तानी के बारे में पूछे गए सवाल पर कहा, कप्तान को अलग-अलग भूमिकाएं निभानी पड़ती हैं। लेकिन जब मैं बल्लेबाजी करने उतरूंगा तो मेरा काम टीम के लिए रन बनाना होगा। टीम के नवनियुक्त कप्तान श्रीलंका के कुमार संगकारा ने कहा, इस बार हमारे पास बेहद मजबूत टीम है जिसमें अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और स्थानीय स्तर के कई बेहतरीन खिलाड़ी हैं। मुझे उम्मीद है कि इस बार हम खिताब जीतने में सफल रहेंगे। ङ्क्षकग्स इलेवन के प्रमोटर नेस वाडिया ने कहा, इस बार हमारे पास पिछली बार से मजबूत टीम है। कुल ३२ खिलाडिय़ों में से दस अंतरराष्ट्रीय स्तर के हैं। इसके अलावा हमने घरेलू टूर्नामेंटों में अच्छा प्रदर्शन करने वाले १४ खिलाडिय़ों को टीम में जगह दी है।

साधु यादव का निलंबन वापस

पटना, १० मार्च। कांग्रेस ने पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद अनिरूद्ध प्रसाद उर्फ साधु यादव के निलंबन को वापस कर लिया है।
कांग्रेस के बिहार मामलों के प्रभारी और पूर्व केन्द्रीय मंत्री जगदीश टाइटलर ने आज संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यादव से उनकी बातचीत हुई है और यादव को अपना पक्ष रखने के लिये लिखित जवाब देने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि यादव पार्टी में बने हुये है।
टाइटलर ने कहा कि बिहार कांग्रेस अध्यक्ष अनिल कुमार शर्मा ने मीडिया में  यादव के बयान के आधार पर उन्हें निलंबित करने की कार्रवाई की थी लेकिन यादव को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का मौका मिलना चाहिये। हालांकि उन्होंने कहा कि वह पूरी तरह से प्रदेश अध्यक्ष के निर्णय के साथ है।
उल्लेखनीय है कि  महिला आरक्षण विधेयक के खिलाफ मीडिया में बयान देने के कारण अनुशासनहीनता के आधार पर यादव को प्रदेश अध्यक्ष ने आज निलम्बित कर दिया था लेकिन दो घंटे के बाद ही टाइटलर ने उनके निलंबन को वापस कर लिया।

''सुरक्षा बल ताकत व दिमाग का प्रयोग करें''
{mosimage}गाजियाबाद, १० मार्च। केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि हवाई अड्डे, अंतरिक्ष और परमाणु प्रतिष्ठानों जैसे महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए सुरक्षा बलों को अपनी ''ताकत और दिमाग'' का इस्तेमाल करना चाहिए।
केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के 41 वें स्थापना दिवस पर मुख्य अतिथि के तौर पर चिदंबरम ने कहा कि बल को एक अनुसंधान एवं विकास इकाई स्थापित करनी चाहिए जिसमें इंजीनियरिंग के विभिन्न वर्गों के बेहद योग्य लोगों को रखा जाए।
चिदंबरम ने कहा कि इस समूह को पूरी दुनिया पर नजर रखनी चाहिए और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए वे जिस तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं उसे समझना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सीआईएसएफ परमाणु ऊर्जा संयंत्रों और अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की रक्षा कर रही है। इसलिए यह बेहद महत्वपूर्ण है कि हम इन महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नवीनतम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करें। जो हवाई अड्डे पर लागू होगा वो परमाणु ऊर्जा प्रतिष्ठान पर लागू नहीं हो सकता। अंतरिक्ष प्रतिष्ठानों पर जो लागू होता है वो कहीं और लागू नहीं होगा।
चिदंबरम ने कहा कि इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि सीआईएसएफ एक छोटी इकाई स्थापित करे। इसमें भौतिकी में स्नातकोत्तर या स्नातक या इंजीनियरिंग में स्नातकोत्तर या स्नातक करने वाले बेहद योग्य लड़कों की सीधी भर्ती की जा सकती है और उसके बाद उस इकाई को पूरी दुनिया पर नजर रखना शुरू कर देना चाहिए कि दुनिया के अन्य जगहों पर कैसे औद्योगिक और अन्य प्रतिष्ठानों की रक्षा की जा रही है।
सीआईएसएफ और अन्य अद्र्धसैनिक बलों में अंतर को रेखांकित करते हुए चिदंबरम ने कहा कि सीआईएसएफ एक सुरक्षा प्रतिष्ठान है इसलिए मेरा मानना है कि यहां ताकत और दिमाग की आवश्यकता है।

''पार्टी में टूट की खबरें बेबुनियाद''
पटना, १० मार्च। बिहार के मुख्यमंत्री और जद-यू के वरिष्ठ नेता नीतीश कुमार ने बुधवार को स्वीकार किया कि महिला आरक्षण को लेकर उनकी पार्टी के भीतर वैचारिक भिन्नता है पर पार्टी में विघटन की कोई आशंका नहीं है।
मीडिया में महिला आरक्षण विधेयक को लेकर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव के साथ मतभेद और पार्टी में टूट की चर्चा को लेकर पूछे गये सवाल पर नीतीश ने कहा कि पार्टी में वैचारिक भिन्नता है पर इसको लेकर पार्टी में टूट की बात बेबुनियाद है।
नीतीश ने कहा कि जनता दल यू के बारे में जो खबरें आ रही हैं उसके बारे में मैं बहुत जानकारी नहीं रखता पर महिला बिल को लेकर जो स्थिति है उसके बारे में मेरे मन में स्पष्टता है।
वहीं, पार्टी अध्यक्ष शरद यादव ने बुधवार को कहा कि यह पार्टी का अंदरूनी मसला है और इसे जल्द ही हल कर लिया जाएगा।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा पृथक पार्टी बनाने की खबरों पर टिप्पणी करते हुए जद (यू) अध्यक्ष शरद यादव ने कहा कि यह सब बेकार की बात है। ऐसा कुछ भी नहीं है।
पार्टी की भावी रणनीति के बारे में यादव ने कहा कि हम विधेयक का विरोध जारी रखेंगे क्योंकि देश की अधिकांश जनता इसके खिलाफ है।
उन्होंने हालांकि सदन में अविश्वास प्रस्ताव पेश किए जाने की संभावना से यह कहते हुए इनकार किया कि हम अविश्वास प्रस्ताव लाने का कोई इरादा नहीं कर रहे हैं।

प्रतापगढ़ भगदड़ में ३ गिरफ्तार

लखनऊ, १० मार्च। प्रतापगढ़ जिले के मनगढ़ आश्रम में गत चार मार्च को हुई भगदड़ की घटना में बुधवार को पुलिस ने आश्रम के प्रबंधक हृरन्य चटर्जी तथा दो अन्य लोगों को गिरफ्तार कर लिया। इस हादसे में 63 लोगों की मौत हो गई थी।
मुख्यमंत्री मायावती ने बुधवार की शाम संवाददाताओं को बताया कि आश्रम में मची भगदड़ की घटना की इलाहाबाद के आयुक्त द्वारा जांच रिपोर्ट शासन को सौंपे जाने के बाद पुलिस ने आज इस घटना के लिए आश्रम के प्रबंधक चटर्जी तथा आश्रम के ही दो अन्य कर्ताधर्ता शिवकुमार तथा अमित को घटना के लिए जिम्मेदार मानते हुए गिरफ्तार कर लिया।
गौरतलब है कि मनगढ़ आश्रम में गत चार मार्च को वहां आयोजित किए गए भंडारे के दौरान आश्रम का गेट गिर जाने से भगदड़ मच गई थी, जिसमें 63 लोगों की मौत हो गई थी और 100 से अधिक लोग घायल हो गए थे।
मायावती ने केन्द्र सरकार पर मुआवजा देने में वादा खिलाफी का आरोप लगाते हुये राज्य सरकार की ओर से मृतकों के आश्रितों को ढाई लाख रूपये तथा गंभीर रूप से घायलों को ७५ हजार रूपये देने की आज घोषणा की।   

पाग पहचान भी कारोबार भी

मधुबनी। विवाह, उपनयन, मुंडन, चूड़ाकरण, सभागाछी, साहित्यिक, सांस्कृतिक कार्यक्रमों में आगत अतिथियों एवं मेजबानों के कंधों पर दोपटा (अंगवस्त्र) और सिर पर पाग धारण करने की परंपरा को मिथिला ने बदलते सास्कृतिक परिवेश में भी सहेज रखा है। दामाद, बहनोई और समधी को पाग-दोपटा, जनेउ देकर विदाई करना यहां की परिपाटी है। यह विशिष्ट सास्कृतिक परिधान इसी इलाके में बनता और बिकता भी है। इसके सहारे सैकड़ों घरों में चूल्हे जलते हैं। सो, यह रोजगार का बेहतर साधन भी है। मधुबनी के राटी, पिलखवार, मंगरौनी, जितवारपुर, रहिका, सतलखा, ककरौल, बेल्हवाड़, भटसीमर, सरिसवपाही, इसहपुर, हाटी, लोहना, बेहट, मधेपुर आदि गावों में खासकर इसकी मांग वैवाहिक लग्न के समय बढ़ जाती है। चाह कर भी बड़े पैमाने पर लोग उत्पादन नहीं कर पाते हैं। हां, कुछ स्वयंसेवी संस्थाएं जैसे मिथिला देशम सेवा समिति, ग्राम विकास परिषद आदि विशिष्ट पाग निर्माण तथा दोपटा पर मधुबनी पेंटिंग करवाने और इसकी ट्रेनिंग देने में जुटी हुई हैं। यही नहीं यहां से बाहर रहने वाले मैथिल परिवारों की मांग पर पाग सप्लाई भी करती हैं।
वर्तमान में पाग की बिक्री 30 रूपये से लेकर 400 रूपए तक में हो रही है। शास्त्रों में भी पाग का वर्णन है। राम सीता विवाह में भी पाग का वर्णन कई जगह मिलता है। मिथिला के राजा द्वारा दिया जाने वाला सम्मान तथा वहां होने वाले शास्त्रार्थ धौत परीक्षा कहलाती थी। राज परिवार विद्वानों को उनके शास्त्रानुसार धौत वस्त्र जिसमें धोती, दोपटा तथा पाग दिया करते थे। न्याय वैशेषिक विद्वानों को लाल पाग तथा महावैयाकरण विद्वानों को श्वेत पाग दिये जाते थे। वर्तमान में इसमें परिवर्तन आया है। उपनयन एवं विवाह में बडुआ तथा वर लाल पाग पहनते हैं। यज्ञादि कर्म में धूसर रंग के पाग इस्तेमाल होता है। जबकि बरात एवं सम्मान के दौरान सफेद पाग की परंपरा है। वैसे, 19 वीं सदी तक यहां साठा पाग का चलन था। यह 60 हाथ लंबा तथा डेढ़ हाथ चौड़े पतले वस्त्र लपेटकर बनाए जाते थे।
दरभंगा महाराज ने इसके स्वरूप में परिवर्तन करवाया। फिर यह वर्तमान रूप में आया है। डा. श्रुतिधारी सिंह कहते हैं कि यज्ञादि कार्य खुली जगह में होते थे। जलवायु प्रभाव से सिर का बचाव पाग से होता था। वहीं डा. योगानंद सिंह झा के अनुसार पहले साठा पाग मार्क आफ आनर (सम्मान का प्रतीक) था। राजा लोग ताखी- ताज पहनते थे। यह विद्वानों को भी दिया जाता था। यह अब भी मिथिला का प्रतीक चिह्न है। सामाजिक परिदृश्य में भी पाग की मांग क्रमश: बढ़ ही रही है। कारण राजनैतिक मंच, सांस्कृतिक कार्यक्रम, विद्वत संगोष्ठी में लगभग सभी मंचों पर मिथिला में पाग दोपटा व मखाना माला से सम्मान करने का चलन है। इसमें जाति, वर्ग भेद मिट गया है। वर्तमान में भी पाग के रंग रूप में परिवर्तन हो रहा है। सिल्क वस्त्र एवं मिथिला पेटिंग युक्त पाग काफी महंगे बिक रहे हैं।

नजर न लग जाए रानी तेरी मूरत को

आगरा। विश्वदाय स्मारकों के शहर ताज नगरी में एक ऐतिहासिक, नायाब और बेशकीमती धरोहर को सहेजने का अंदाज अजब है। इसे साफ कर हर तीन माह में कालिख पोत दी जाती है।
ये धरोहर है कुछ और नहीं उस ब्रिटिश शासन की महारानी विक्टोरिया और फेरी की प्रतिमाएं हैं, जिनके राज्य में कभी सूर्य नहीं डूबता था। भारत की आजादी के पहले ये प्रतिमाएं विक्टोरिया पार्क की शान हुआ करती थीं। परंतु अब अष्टधातु से निर्मित करोड़ों रूपये की तीन प्रतिमाओं पर काले रंग की कई परतें चढ़ चुकी है। ये प्रतिमाएं स्काटलैण्ड में तैयार होने के बाद कोलकाता के रास्ते आगरा भेजी गई थीं। आगरा गजेटियर के मुताबिक वायसराय लार्ड कर्जन के समय में महारानी के नजदीकी आगरा निवासी करीम खान के निजी प्रयासों से प्रतिमाओं को आगरा में स्थापित कराया गया था।
इस बीच देश आजाद हुआ तो विक्टोरिया पार्क से महारानी की प्रतिमा को गुलामी की निशानी मानकर हटा दिया गया। उस स्थान पर पंडित मोतीलाल नेहरू की प्रतिमा स्थापित की गई। अष्टधातु की करोड़ों की कीमत वाली इन प्रतिमाओं की सुरक्षा का सवाल उठा तो उन्हें वर्ष 1948 में पुलिस लाइन के सामने स्थित फायर स्टेशन के आफिस में भेज दिया गया। अष्टधातु की चमक इन प्रतिमाओं की ओर लोगों का ध्यान खींचने लगी ऐसे में इनकी सुरक्षा और प्रतिमाओं को सामान्य दिखाने के लिए इन पर कालिख पोतना शुरू कर दिया गया। तब से हर तीन महीने में इनकी सफाई के बाद प्रतिमाओं पर जला हुआ मोबिल ऑयल डाला जाता है।
फायर कर्मचारियों के मुताबिक कई साल पहले पुरातत्व विभाग के अधिकारी प्रतिमाओं का निरीक्षण करने पहुंचे थे, तब इनकी कीमत कई करोड़ रूपए आकी गई थी। उसके बाद कोई अधिकारी नहीं गया। काला तेल डालने के पीछे तर्क यह दिया जाता है कि सूरज की किरणें पडऩे पर इनमें से बहुत तेज चमक उठती है। सुरक्षा की वजह से इस चमक को दबाया जाता है।

उत्तरी नाइजीरिया से ईसाई कर रहे पलायन

अबूजा। नाइजीरिया में सप्ताहांत हुए हमले में पांच सौ से अधिक ईसाइयों के मारे जाने के बाद फिर से हमले की आशंका से भयभीत होकर देश के उत्तरी राज्य प्लातेऊ की राजधानी जोस के आसपास के गांवों से इस समुदाय के लोग अपने घरों को छोड़कर अन्यत्र जा रहे हैं।
हालांकि इस क्षेत्र में सेना ने सुरक्षा का जिम्मा संभाल लिया है लेकिन इसके बावजूद ईसाई अपने घरों को छोड़ रहे हैं। दो समुदायों के कुछ युवकों के बीच पुलिस कालेज में हुई झड़प के चलते सेना के जवानों को कालेज परिसर में प्रवेश कर गोली चलानी पड़ी, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई।
नाइजीरिया के ईसाई संघ (सीएएन) के राष्ट्रीय सचिव सैम्यूल सलीफू ने कहा कि यह एक धार्मिक संकट है। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि राजधानी जोस में उत्पन्न हुआ संकट पूरी तरह धार्मिक है। उन्होंने कहा कि निर्दोष लोगों की जघन्य हत्याएं करने की योजना पहले ही से तय थी। डोगो नाहव गांव में हुई हत्याओं के कारण देश की संसद में तनावपूर्ण माहौल रहा तथा इसके दोषियों को न्याय के कठघरे में लाने का संकल्प लिया गया।
एक स्थानीय निवासी नडुका क्रिस्टोफर ने कहा कि हम फिर फिर से हमले होने की आशंका से भयभीत हैं। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
व्यावसायिक राजधानी लागोस राज्य के गवर्नर बबतुंडे फशोल ने लोगों को आश्वासन दिया कि बदले की भावना के चलते हिंसा नहीं होगी। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि किसी व्यक्ति को बदले की भावना से हमले के बारे में नहीं सोचना चाहिए।
गौरतलब है कि जोस के आसपास के गांवों में रविवार की सुबह बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी। इसमें मारे गए लोगों में अधिकतर बच्चे और महिलाएं थीं। ऐसा माना जा रहा है कि हमलावर फुलनी समुदाय के थे जो जनवरी में जोस में हुई हत्याओं का बदला लेना चाहते थे। इस हमले में बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग हताहत हुए थे।

आर्ट बनाने के लिए जमा दिया घर

डेट्राइट। लोगों में अलग अलग तरह के शौक होते है और वो अपने शौक को पूरा करने में किसी भी हद को पार कर जाते है। अब डेट्राइट के उन दो कलाकारों को ही ले लें जिन्होंने आर्ट बनाने के लिए घर को ही जमा डाला। वो दोनों माइनस दस डिग्री सेल्सियस तक गिर जाने वाले पारें में उस दो बेडरूम घर में एक माह तक रहे।
इन्होंने आर्ट बनाने की अपनी सनक पूरी करने के लिए डेट्राइट में एक बैंक से घर खरीदा जो इन्हें काफी सस्ता पड़ गया। घर तो मात्र 45 हजार का ही मिल गया लेकिन इसको जमाने के लिए इन्होंने 7 लाख रूपए और खर्च कर डालें।
इन सनकी आर्टिस्टों को घर जमाने का इरादा पाइप फटने से घर पर जमी बर्फ देखकर आया। ये दोनों 7 जनवरी से 7 फरवरी तक उस घर में रहे और लगातार काम करते रहे। घर के बाहर इन्होंने एक कार खड़ी कर रखी थी जिसका इस्तेमाल ये आराम करने के लिए करते थे।
दोने 12-12 घंटों की शिफ्ट में घर को जमाने का काम करते, जब एक थक जाता तो दूसरे काम पर आ जाता और वो कार में आराम करने चला जाता।
दोनों ने घर को जमाने के लिए लगभग सवा लाख लीटर पानी घर पर डाला। और आखिरकार इनका घर बर्फ से जम गया।